सोचता हूँ

और रात का एक-एक लम्हा, तेरे साथ होने का, अहसास देता है. जब मुझे, तब, मैं भूल जाता हूँ, स्वयं को भी !

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क्या इस औरंगजेब को आप भी जानते हैं ?

...यह सही है कि औरंगजेब ने कुछ फैसले ऐसे अवश्य लिये जो विवादास्पद रहे, परन्तु पूरे शासनकाल में कुछ ऐसे फैसलों के कारण मात्र से उस पर कट्टरता तथा अत्याचारी का लेबल लगाना कतई न्यायोचित नहीं है. इससे पूर्व प्रसिद्ध लेखक व तत्कालीन राज्यपाल प्रो. बी. एन पाण्डेय, ने अपनी पुस्तक ‘‘इतिहास के साथ यह अन्याय” में भी औरंगजेब को बहुत सहिष्णु सम्राट बताया था.

किसने की थी अकबर महान के स्मारक की दुर्दशा ?

ख़ास बात यह थी कि औरंगजेब की दिलचस्पी अपने पड़ दादा के स्मारक को उसके गौरवपूर्ण रूप में लाने की नहीं रही, वह केवल सोने, चांदी और गहनों की बरामदगी और अपने प्रभुत्व को कायम रखने में दिलचस्पी रखता था. वैसे भी औरंगजेब ने वास्तुकला तथा विशाल निर्माणों को अपनी प्राथमिकता कभी नहीं माना. इसी कारण अकबर महान का यह खूबसूरत स्मारक सैकड़ों साल बदहाली की स्थिति में रहा. इसकी वृहद् मरम्मत तथा पुनर्निर्माण करने का श्रेय ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लार्ड कर्ज़न को जाता है.

एक स्वप्न की मौत

....आज, सुनिधि को पुरस्कार मिलने की खबर से पुनः मेरी आँखें नम हो आई. पर, आज यह आंसू ख़ुशी के थे. सुरभि के स्वप्न को जो जिया था सुनिधि ने, उसके अधूरे काम को बेहतरीन ढंग से पूरा कर. फिल्म थी “शिवाकासी—एक स्वप्न की मौत”, जो वहाँ के असंगठित पटाखा उद्योग में लगे हजारों बाल श्रमिकों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति के दोहन तथा सरकारी उपेक्षा पर एक बेहतरीन रिपोर्ताज थी ! ...कम से कम सुरभि और अमिय का यूँ अचानक अखबार के पन्ने में एक खबर में सिमट जाने का आशीर्वाद सुनिधि को मिल गया था.क्या सपने मरते हैं भला कभी ?

संबल

तुम्हारे कुछ लम्हे, कुछ नाजुक से वह पल, जो मेरे अहसासों को जीते हैं, तुम में, और कुछ यादें, जो तुम्हें, देती हैं सुकूं, चुराना चाहता हूँ, मैं भी, ताकि पढ़ सकूं, मन की बातें, और खुल सकें, तुम्हारे खूबसूरत-से, इस अंतर्मन के राज, जिनसे हूँ मैं अभिभूत, और जो देते है सम्मान तुम्हें, तुम्हारी… Continue reading संबल

रामकिशोर

रामकिशोर ने एक बार बेटे अमित को घूरा और फिर प्यार से उस कुत्ते की और नजर डाली जो धीरे-धीरे आँखों से ओझिल हो गया था.. ....और गाडी उस गली से काफी दूर निकल आई.

…तुम साथ हो !

चिड़ियों का कलरव, कोयल की कूक, कभी-कभी, मौसम होता है ऐसा, थम क्यूँ नहीं जाता यह, कम से कम तब तक, जब तक तुम साथ हो मेरे !