–राजगोपाल सिंह वर्मा

धड़कनों से इन,
दी हैं तुमने,
कुछ साँसें,
सदा के लिये,
अपने अंश को,
सस्नेह,
सहृदय बनकर,
साक्षी है वह,
प्यार का तुम्हारे,
महसूस किया,
जिसका,
एक-एक पल,
अपने भीतर,
उकेर दिए हैं,
सपने सारे,
कल्पनायें,
कुछ अहसास,
अनुभूतियां,
अद्भुत सी,
एक रोमांच,
अंततः,
करिश्मा,
प्रकृति का,
हुआ है साकार,
तुममें,
तृप्त हो तुम,
संतृप्त हो,
पूर्ण हो,
गौण है शेष,
सब कुछ !

 

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