–राजगोपाल सिंह वर्मा 

यह खूबसूरत जंगल,
और रास्ते,
पेड़ों से झड़ते पत्ते,
हवा के झोंके,
पक्षियों की कलरव,
झील में तैरती बत्तखें,
इतना तो काफी है,
कुछ अदद कवितायेँ,
रचने के लिये.

(कुछ वर्ष पूर्व भरतपुर स्थित घाना अंतर्राष्ट्रीय पक्षी विहार के भ्रमण के दौरान)

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