ताजमहल,
और नज़ारा,
कैद से,
शाहजहाँ-सी किस्मत,
किसको चाहिये,
भरपूर प्यार,
और निशानी मुहब्बत की,
…..फिर,
अँधेरे ही अँधेरे,
कालकोठरी,
तन्हाई,
एक दुखांत,
प्रेम-कथा.
….यह ताज है,
जी हां,
प्रेम का पर्याय.

–राजगोपाल सिंह वर्मा 

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