जिंदगी क्या है,
एक छलावा,
बस,
हो सके तो,
रखा करो नजदीकियां,
पहले की ही तरह,
कुछ भरोसा नहीं इसका,
फिर मत कहना,
अधूरी रह गई,
कुछ ख्वाहिशें,
मुलाकातें,
और बातें,
चले गए तुम,
यूँ ही,
बिन बताये,
और हमें,
कुछ इल्म भी न हुआ,
सिर्फ एक खालीपन,
नीरवता,
और अहसास,
रह जायेंगे साथ !

–राजगोपाल सिंह वर्मा

 

Advertisements