१.

खट्टी-मीठी कुछ बातों,
और बेतरतीब लफ्जों,
के साये में,
संधान करते हैं,
कुछ अनजाने से,
सपनों का,
जिनके सिरहाने पर,
कुछ अरमानों में,
आँखों की सेज पर,
यूँ ही तो हम मिलते हैं,
अक्सर,
कुछ और बातें करते है,
मुस्कुराते हैं,
खिलखिलाते हैं,
हर पल का इंतज़ार,
बांधे रखता है मुझे
पूरी शिद्दत से.

२.
आस है गहरी,
अभी भी,
क्यूंकि,
अंधेरों में ताकत हो तुम,
उजालों में मजबूती,
तुम हो तो,
सब कुछ है अच्छा,
और न हो तो,
नज़ारे भी,
बन जायें उदास,
शांत हो जाए,
समुन्दर जैसे,
भूल जाये,
दरिया अपना बहाव,
यकीनन,
जिन्दगी बेहतर है,
तुमसे मिलने के बाद,
क्या चाहिए अब,
तुम्हारे साथ के बाद,
निगाहों में सुकून पाना भी,
बहुत है,
तेरे लम्हों में आना मेरा,
क्या कुछ कम है !

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