तुम्हारे अहसास की,
कुछ अदद खुशबुएँ,
मुझे,
एक बहाना दे जाती हैं,
मुस्कुराने का,
तुम,
यहीं कहीं हो,
यह भी जान जाता हूँ मैं,
क्यूंकि
हवाओं के बहाव में,
कुछ अदा अलग है,
आज,
और,
सूरज की गर्माहट भी,
पिघल रही है,
खुशनुमा मौसम के बीच,
आ भी जाओ,
अब इन लम्हों को,
यादगार बना दो न,
तुम !

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