तुम्हारा स्नेह,
और स्फुरित होते,
प्रकाश में,
मुझे दिखता है,
शक्ति पुंज,
प्रेम का,
मैंने सीखी हैं,
खूबसूरत प्रेमल बातें,
तुम्हारे सौंदर्य से,
बोध मिलता है उससे जो,
कविताओं में उतरता है मेरी वह,
हृदय की गहराइयों में,
उतर आई हो तुम,
महसूस करता हूँ मैं,
सिर्फ मैं,
और,
जब कभी,
तुम्हारी आँखें,
खोज लेती है तुम्हें स्वयं,
मेरे इस मन की तलहटी में,
तब इस कला का,
उपासक बन जाता हूँ,
मैं भी!

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