तुम्हारे कुछ लम्हे,
कुछ नाजुक से वह पल,
जो मेरे अहसासों को जीते हैं,
तुम में,
और कुछ यादें,
जो तुम्हें,
देती हैं सुकूं,
चुराना चाहता हूँ,
मैं भी,
ताकि पढ़ सकूं,
मन की बातें,
और खुल सकें,
तुम्हारे खूबसूरत-से,
इस अंतर्मन के राज,
जिनसे हूँ मैं अभिभूत,
और जो देते है सम्मान तुम्हें,
तुम्हारी सोच को,
और बनते हैं,
मेरा भी संबल,
बना जाते हैं,
खूबसूरत,
खुशबुओं से अपनी,
इस जिन्दगी को भी.

Advertisements