तुम

तुम नहीं तो, बारिश की बूँदें, हो जाती निस्तेज, बहता पानी छोड़ जाता, अपने निशां, दिल के कोने में ज्यूँ;

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मैं वही हूँ

ख़त मैंने रोज़ लिखे, इन्हीं हाथों से, जिनके लफ्ज़, दिल की गहराइयों से, निकले थे, और स्याही में डूबे थे, मुहब्बत के कुछ, हसीं अफ़साने और, थोड़ी सी नींद,

अहसास

संजीदा से कुछ अहसास, बदल जाते हैं, लफ्जों में जब, कलम का रोमांच, और कागज़ का साथ, कभी बारिश की बूंदों में, या घने वृक्ष की छाँव मे, ढूढता है कुछ, कभी दरिया के मुकम्मिल बहाव में, यादों का फलसफा, और रूहानी मुहब्बत, सब कुछ तो है, उस मसरूफियत में भी, दिल के करीब और… Continue reading अहसास

किरणें

अन्धकार के दानव ने, डस लिया उसे भी बेवक्त, और फैलाया अपना साम्राज्य, चहुँ ओर, पर फिर भी, हार नहीं मानी नन्हीं किरणों ने, हर दिन लिया पुनर्जन्म, कुछ आशाओं ने,