संजीदा से कुछ अहसास,

बदल जाते हैं,

लफ्जों में जब,

कलम का रोमांच,

और कागज़ का साथ,

कभी बारिश की बूंदों में,

या घने वृक्ष की छाँव मे,

ढूढता है कुछ,

कभी दरिया के

मुकम्मिल बहाव में,

यादों का फलसफा,

और रूहानी मुहब्बत,

सब कुछ तो है,

उस मसरूफियत में भी,

दिल के करीब और

उससे दूर भी  !

Advertisements