अगर आप सड़क मार्ग से जोधपुर से पाली की ओर जा रहे हों तो नगर से मात्र २० मिनट पहले एक मंदिर तथा उस पर जमा भक्तों की भीड़ में आप भी शामिल हो सकते हैं, जहाँ रॉयल एन फील्ड की बुलेट मोटरसाइकिल की पूजा की जाती है.

आस्था और अन्धविश्वास के इस मंदिर में श्रद्धालु लोग शराब की बोतल भी चढाते हैं, और वह भी ड्यूटी पर मौजूद पुलिस कर्मियों की उपस्थिति में.

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इस स्थल की कहानी यह है कि सन 1988 में ओम बन्ना अपनी बुलेट पर अपने ससुराल बगड़ी,साण्डेराव से अपने गाँव चोटिला आ रहे थे तभी उनका एक्सीडेंट एक पेड़ से टकराने से हो गया ओम सिंह राठौड़ की उसी वक़्त मृत्यु हो गयी एक्सीडेंट के बाद उनकी बुलेट को रोहिट थाने ले जाया गया पर अगले दिन पुलिस कर्मियों को वो बुलेट थाने में नही मिली वो बुलेट बिना सवारी चल कर उसी स्थान पर चली गयी.

अगले दिन फिर उनकी बुलेट को रोहिट थाने ले जाया गया पर फिर वही बात हुयी ऐसा तीन बार हुआ चौथी बार पुलिस ने बुलेट को थाने में चैन से बाँध कर रखा पर बुलेट सबके सामने चालू होकर पुनः अपने मालिक सवार के दुर्घटना स्थल पर पहुंच गयी अतः ग्रामीणो और पुलिस वालो ने चमत्कार मान कर उस बुलेट को वही पर रख दिया उस दिन से आज तक वहा दूसरी कोई बड़ी दुर्घटना वह नही हुयी जबकि पहले ये एरिया राजस्थान के बड़े दुर्घटना क्षेत्रो में से एक था.

कहते हैं किओम बन्ना की पवित्र आत्मा आज भी वह लोगो को अपनी मौजूदगी का एहसास कराती है आज भी रोहट थाने के नए थानेदार कार्यभार संभालने से से पहले वहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं.

पाली जोधपुर राष्ट्रीय राज मार्ग पर इस स्थान यहाँ आज भी वही बुलेट मौजूद है और ओम बन्ना का चबूतरा भी है जहा उनका एक्सीडेंट हुआ था यहाँ दिन रात जोत जलती रहती है और ग्रामीण यहाँ नारियल, फूल, दारू आदि चढ़ावा चढाते हैं.

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