तुम्हारी आँखों की…
सुरमई शामों में,
मौजूद हैं…
मेरी तन्हाइयां,
आज भी…
पलकों के पास,
बसेरा है…
कुछ अनकहे,
अल्फ़ाज़ों का…
नज़र उठाओ तो,
पढ़ सको….
उनको भीे,
और…
नज़र मिलाओ तो,
पहचान लो…
इन निगाहों को भी,
तुम !

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