कितना भी अकेला हूँ…
भले ही मैं…
तेरे अहसास की किरणें…
सूरज की जलती गर्मी से छिटक…
सुनहरे धागों से बुनी…
चादर बन…
खुशनुमा अहसास के साथ …
होती हैं पास मेरे…
हमेशा.

….और,
अंधेरों में…
ढूंढ ही लेता है…
यह एकाकी जीवन…
तुमसा साथी अपना…
अनगिनत चमकते…
जुगनुओं-से तारों…
और एक अदद…
चाँद, और जगमग सितारों की…
दिलकश रोशनियों में भी.

इन बारिशों का भी…
भरोसा कब है…
अपने से बरसती हैं…
हमेशा से यह तो,
इनकी राह देखोगे…
तो प्यासे रह जाओगे…
तुम भी…
किन्हीं अनजान…
चाहतों की तरह.

मेरी तन्हाइयां मुस्कुराती हैं…
तेरी सरगोशियों और…
कुछ ऐसे जुनून पर…
जो मुमकिन नहीं यूँ तो…
किसी वक्त…
हर किसी के लिए भी
पर तेरे प्यार में..
वो कौन सी बात है…
जो मुमकिन नहीं.

तेरी हर बात में…
तेरे प्यार का अक्स दिखता है…
इक सादगी का…
कुछ अनकही सी…
छिपाई गई…
उन बातों का…
जिनसे बना है यह…
इक हसीं जुनूँ तेरा…
पता है तुझको भी…
कि छिप न सकेगा यूँ कभी…
प्यार वह…
जो तेरे दिल में है.

अलहदा है तू यूँ भी…
उन्मुक्त और स्वछन्द-सी…
पर…
बंद कमरों में भी…
कसमसाते हैं…
दरवाजों केे चौखट,
और खिड़कियां के शीशे…
चटखना चाहते हों जैसे…
बंद हैं घर के…
वह तमाम रस्ते,
जिनसे लेते थे…
सांसें कभी…
हवाओं पे पहरा भी,
है बहुत गहरा…
तन्हाइयों का मौसम रहा वह …
और था सिर्फ उदासियों का घेरा !

जितना आना था…
आ चुका दौर..
उस इंकलाब का…
जब सुनाना हो तुमको…
अपना फलसफा…
रुमानियत को तुम…
कर देना दफ़न…
गहराई में जाकर…
तुम्हारी आत्मा से है…
मिलन मेरा…
कुछ जुदा सा है…
यह रिश्ता…
मन में नज़ाकत नहीं…
ताकत है अभी…
और हौसलों में उड़ान भी…
जिंदगी तेरी है यह…
किसी से कर्ज पर तो नहीं.

चाँद तारों पे है यकीं गर तुझको…
आग सूरज की भी तो…
सहनी होगी…
रोज-रोज के इम्तिहान से बेहतर…
मेरे सीने में झांक लो…
तुम बस इक बार…
जिंदगी तुमको यूँ तो…
अपनी शर्तों पर लेकिन…
कुछ मेरे प्यार में भी जीनी होगी.
😊😊

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