आप पर गर्व है डॉ अनूप खरे !

अनूप खरे आगरा के प्रतिष्ठित ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं. वह स्वयं अपना क्लिनिक चलाते हैं और कई प्रतिष्ठित नर्सिंग होम्स में अपनी सेवाएँ भी देते हैं. पत्नी को उनकी हड्डियों की समस्या के कारण दिखाना था. पहली बार की भेंट ने ही उन्होंने हम लोगों का दिल जीत लिया. फीस तो उनको भी अदा ही की न. पर जिस निश्छल तथा निर्मल स्वभाव से वह पेशेंट्स को पूरी तल्लीनता से समय देते हैं, और उससे व्यक्तिगत संवाद स्थापित करते हैं हैं, वह चमत्कारिक है.

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प्रारब्ध

हालांकि ठाकुर साब से मेरी मित्रता अधिक पुरानी भी नहीं थी. मात्र लगभग साढ़े तीन साल हुए थे, उनसे मुलाक़ात हुए, और वह भी वाकिंग प्लाजा में. कॉलोनी का यह पार्क टहलने वालों के लिए स्वर्ग से कम नहीं था. ठाकुर साब अपने आठ-दस लोगों की मण्डली में चुटकुले और अपने किस्से सुनाते हुए तेज़ और सधे क़दमों से जब पार्क की दूरियां नापते तो कोई अनजान व्यक्ति भी समझ सकता था कि यह छः फीट का इंसान जरूर किसी पुलिस, सेना या ऐसी ही किसी संस्था से जुडा होगा, जहाँ चुस्ती और फिटनेस की अलग ही महत्ता है.

अहसास की किरणें…

बंद कमरों में भी... कसमसाते हैं... दरवाजों केे चौखट, और खिड़कियां के शीशे... चटखना चाहते हों जैसे... बंद हैं घर के... वह तमाम रस्ते, जिनसे लेते थे... सांसें कभी... हवाओं पे पहरा भी, है बहुत गहरा...

बेटी

मुस्कुराई वो जब भी, लगा वसंत ऋतू आई, अंगुली पकड़ना, कभी गिरना, फिर संभलना, वो खिलखिलाये जब भी, पुष्प झरते हों जैसे, उसकी बातें जैसे, बहती ठंडी हवाएं !

क्षितिज के पार

...याद करते-करते मैं अतीत में खो सा गया था. कहते हैं कि अतीत की स्मृतियाँ तथा भविष्य की कल्पनाएँ मनुष्य को उसके वर्तमान का आनंद नहीं लेने देती परन्तु, मेरे विचार से वर्तमान में सही तरीके से जीने के लिये अनुकूलता और प्रतिकूलता— दोनों में रम जाना आवश्यक है. यह भी उतना ही जरूरी है कि अतीत को कभी विस्मृत न होने दो, क्यूंकि अतीत का बोध हमें जाने-अनजाने में की गई भूलों से बचाता है...यही सोचते हुये मैं पार्किंग से गाडी निकालकर सीधे घर वापिस चला आया, हालाँकि कुछ अदद खरीदारियां करनी थी मुझे किताबों की, पर वह कार्यक्रम अब टल गया था.